Lucknow News:एक जगह जमीन नहीं, अटकी कैटल कॉलोनी – Cattle Colony Project Stalled Due To Lack Of A Single, Consolidated Land Site


लखनऊ। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद शहर की डेयरियों को कैटल कॉलोनी बनाकर स्थानांतरित करने की योजना जमीन की कमी के कारण अटकी हुई है। करीब पांच साल पहले इस संबंध में आदेश जारी हुआ था। पर अब तक इस पर कोई अमल नहीं हो पाया है। इससे शहर में अवैध डेयरियों पर लगाम नहीं लग पा रही है। साथ ही उन्हें व्यवस्थित भी नहीं किया जा पा रहा है।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 15 सितंबर 2021 को सिराजुल अली व अन्य की याचिका पर विस्तारित सीमा के लिए भी कैटल कॉलोनी बनाने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम के डेयरियों को हटाने पर सवाल उठाया था। उनका तर्क था कि कैटल कॉलोनी बनने तक डेयरियों को हटाया न जाए। प्रशासन ने तब कोर्ट को बताया था कि कैटल कॉलोनी बनाने की योजना पर काम चल रहा है। 2023 में नगर विकास विभाग ने कोर्ट को कार्ययोजना पेश करने और तीन महीने में अमल की बात कही थी। हालांकि, इस पर भी कोई प्रगति नहीं हुई।

जमीन की कमी बनी बाधा : 2023 में जिला प्रशासन ने सभी तहसीलों को कैटल कॉलोनी के लिए जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया था। बीकेटी, मोहनलालगंज, मलिहाबाद और सरोजनीनगर में कुल 89 हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर जानकारी एलडीए को दी गई, क्योंकि उसे ही कैटल कॉलोनी विकसित करनी थी मगर तत्कालीन एलडीए सचिव ने कहा था कि चिह्नित जमीन एक जगह नहीं है। यह 29 अलग-अलग गांवों में बिखरी हुई है। इतनी बिखरी जमीन पर सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं विकसित करना संभव नहीं है।

इसके बाद जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों को अपने स्तर पर इन बिखरी जमीनों पर सुविधा विकसित करने के निर्देश दिया। वहीं, तहसीलों को हर खसरे का मौके पर सत्यापन करने के लिए भी कहा गया था। जिन पशुपालकों के पास शहर के बाहर अपनी जमीन है, उन्हें वहीं स्थानांतरित होने के लिए कहा गया था। हालांकि यह सब केवल कागजों तक ही सीमित रहा।

प्राथमिकता पर बने कैटल काॅलोनी

सपा पार्षद दल के नेता कामरान बेग ने कहा कि प्रशासन को डेयरी वालों के लिए कैटल कॉलोनी प्राथमिकता पर बनानी चाहिए। यह रोजी-रोटी से जुड़ा मामला है। एलडीए और आवास विकास नई आवासीय कॉलोनियां तो खूब ला रहे हैं पर कैटल कॉलोनी के लिए जमीन का संकट बताते हैं। एक जगह जमीन नहीं मिलती तो अलग-अलग जगहों पर कॉलोनी बनाई जा सकती है।

नगर निगम कर चुका सर्वे

नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी अभिनव वर्मा ने बताया कि कैटल कॉलोनी बसाने का काम एलडीए, आवास विकास और जिला प्रशासन को करना है। नगर निगम को शहर में कुल डेयरियों की संख्या का सर्वे कर रिपोर्ट देनी थी, जो दे दी गई है। कॉलोनी विकसित होने के बाद नगर निगम स्थानांतरण में सहयोग करेगा।

एलडीए अभी शहर के बाहर कोई कैटल कॉलोनी नहीं बना रहा है। वर्तमान में ऐसी कोई कार्ययोजना भी नहीं है। – प्रथमेश कुमार, एलडीए वीसी



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