यूपी:किशोर को लापरवाही से गिरफ्तार कर हिरासत में भेजने पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस और मजिस्ट्रेटों को दी चेतावनी – High Court Issues Strict Warning To Police And Magistrates Over Negligent Arrest And Detention Of Juvenile


हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को सात साल तक की सजा के प्रावधान वाले अपराधों में किशोर की गिरफ्तारी और रिमांड के मामलों में “लापरवाह या संवेदनहीन रवैया” अपनाने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी/ न्यायिक अधिकारी इस मुद्दे को हल्के में न लें।

अदालत ने यह टिप्पणी लखनऊ के एक किशोर अपचारी से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के संदर्भ में की, जिसे एक ऐसे मामले में बार-बार न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसमें अधिकतम सजा तीन साल थी और एक अन्य प्रावधान के जुड़ने के बाद पांच साल हो गई थी।

मुद्दे को हल्के में न लें

कोर्ट ने कहा अगर अंत में, अवैध कारावास का तथ्य, यदि सिद्ध हो जाता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोषी अधिकारी/ न्यायिक अधिकारियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इसलिए, सभी संबंधित अधिकारी/ न्यायिक अधिकारी उपरोक्त मुद्दे को हल्के में न लें।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने नाबालिग किशोर की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने पहले, याचिका का निपटारा करते हुए किशोर की हिरासत को प्रथम दृष्टया अवैध पाया था। उसे तत्काल जेल से रिहा करने का निर्देश दिया था।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *