सुना है क्या:’साहब को नहीं दी विदाई’, साथ ही ‘आसान नहीं हाथी की सवारी और तीन मिनट में ता-रा-रा’ के किस्से – Boss Not Being Given Farewell As Well As Riding Elephant Is No Easy Feat And Three-minute Ta-ra-ra

सुना है क्या:’साहब को नहीं दी विदाई’, साथ ही ‘आसान नहीं हाथी की सवारी और तीन मिनट में ता-रा-रा’ के किस्से – Boss Not Being Given Farewell As Well As Riding Elephant Is No Easy Feat And Three-minute Ta-ra-ra


यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘चहेतों ने भी साहब को नहीं दी विदाई’ की कहानी। इसके अलावा ‘आसान नहीं हाथी की सवारी’ और ‘तीन मिनट में ता-रा-रा’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

चहेतों ने भी साहब को नहीं दी विदाई

खुद के व्यवहार और कारनामों से अक्सर सुर्खियां बटोरने वाले गांवों के विकास से जुड़े महकमे के साहब कुर्सी से क्या हटे, उनकी विदाई से उन चहेतों ने भी दूरी बना ली जो तबादले से पहले तक उनके कान भरकर विरोधियों को निपटाते रहे हैं। दरअसल, तबादला हुआ तो दूसरे दिन विदाई भी होनी थी, लेकिन विदाई के नाम पर सिर्फ कार्यभार का लेनदेन हुआ। साहब को उम्मीद थी कि उनके कान भरने वाले जरूर अच्छी विदाई देंगे, लेकिन सभी दूर रहे। आधे घंटे तक साहब ने इंतजार भी किया कि कोई एक फूल देकर विदाई दे दे, लेकिन कोई नहीं पहुंचा तो साहब भी गुनगुनाते हुए वहां से निकल गए कि बड़े बे-आबरू होके तेरे कूचे से निकले हम।”

आसान नहीं हाथी की सवारी

राजधानी से सटे एक जिले में एक नेताजी हाथी पर सवार होने को मचल रहे थे। महावत की मंजूरी के बिना खुद को संभावित सवार मानकर क्षेत्र में घूमने लगे। जोनल से लेकर नोडल को धता बताकर पोस्टर-बैनर भी छपवा लिए। अब भला हाथी की सवारी मुफ्त में कहां होती है? लिहाजा महावत ने भी पैंतरा आजमाया और हाथी ने नेताजी को झटका लेकर चारों खाने चित कर दिया। अब नेताजी को समझ नहीं आ रहा कि महावत को सेट करें या कोई साइकिल मिल जाए तो आगे का सफर पूरा करें।

तीन मिनट में ता-रा-रा

आयोग के मुखिया के लिए फूलों से लकदक मंच सजाया गया। खूब प्रचार हुआ कि लकदक मंच से मुखियाजी संवाद करेंगे। सवालों के जवाब देंगे। मुखियाजी तय समय से आधा घंटे लेट पहुंचे और कुछ क्षण अपनी बात कहकर चले गए। अलबत्ता आगे संवाद करने का वादा जरूर किया। उनके जाने के बाद इस कार्यक्रम की तैयारी करने वाले आयोग के कर्मचारी व अधिकारी ही कहने लगे…तीन मिनट में ता-रा-रा।



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