लखनऊ। तीन दिवसीय 18वें ब्रिक्स एकेडमिक फोरम के दूसरे दिन नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने ब्रिक्स के 20 वर्षों के सफर की समीक्षा की। दस से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग का साक्षी बना लखनऊ विश्वविद्यालय का मालवीय सभागार। इस दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि ब्रिक्स देशों का वैश्विक जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत योगदान है, लेकिन वैश्विक व्यापार में उनकी हिस्सेदारी केवल 25 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
समीर सरन ने ब्रिक्स के तीसरे दशक के लिए तीन प्राथमिकताएं बताईं। इनमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, तकनीक से समावेशी विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई शामिल है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ), रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) और लखनऊ विवि ने मिलकर इस फोरम का आयोजन किया। विदेश मंत्रालय के सचिव (ईआर) और भारत के ब्रिक्स शेरपा सुधाकर दलेला ने कहा, ब्रिक्स अकादमिक मंच एक अग्रणी पहल है जिसने ब्रिक्स के भीतर बौद्धिक जुड़ाव और सहयोग को बनाए रखा है।
अगली पीढ़ी की जिम्मेदारियों पर जोर
‘ब्रिक्स एट 20’ सत्र में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष हर्ष वी. पंत ने अगली पीढ़ी की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने अधिक न्यायपूर्ण, समतामूलक, समृद्ध और स्थिर भविष्य के निर्माण की बात कही। चीन काउंसिल फॉर ब्रिक्स थिंक-टैंक कोऑपरेशन की उप महासचिव जिंग झाओ ने युवा शोधकर्ताओं की जरूरत को बेहद अहम बताया। कहा, उनकी भागीदारी बढ़ानी होगी। उन्होंने अकादमिक आदान-प्रदान और शोध के अवसर बढ़ाने की भी बात कही।
तकनीकी नवाचार की आवश्यकता
जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितता के बीच लचीली व्यवस्था को विकसित करने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा, नवाचार का लाभ सीधे लोगों, समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचना चाहिए। केयर एज के प्रबंध निदेशक एवं समूह सीईओ मेहुल पांड्या ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में संप्रभु क्रेडिट रेटिंग व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई। संप्रभु आकलन में कर्ज की संरचना, पूंजी निर्माण, जलवायु जोखिम और संरचनात्मक सुधारों को केवल फुटनोट तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
सितंबर में होगी अगली ब्रिक्स समिट
ब्रिक्स की अगली समिट सितंबर में दिल्ली में प्रस्तावित है। इससे पहले आयोजित एकेडमिक फोरम सदस्य देशों के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की सीनियर फेलो रुचिता बेरी ने कहा कि आपसी सहयोग के परिणाम जल्द सामने आएंगे।
इस बार की थीम रही ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन एंड कोऑपरेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी’
फोरम में ब्रिक्स के 10 देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, यूएई, ईरान, इथोपिया और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बार की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन एंड कोऑपरेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी’ रखी गई। इथोपिया के इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन अफेयर्स के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मोहम्मद राफी अबेराया के अलावा यूएई की प्रतिनिधि उमर अलशमसी, साउथ अफ्रीका के यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु-नटाल की क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक स्टडीज विभाग की प्रमुख निर्मला देवी गोपाल, रूस की एक्सपर्ट विक्टोरिया पनोवा ऑनलाइन जुड़ीं। ईरान के अलीरजा खोदाघोलीपुर ने युद्ध के अनुभव साझा किए। मिस्र के इंफॉर्मेशन एंड डिसीजन सपोर्ट सेंटर के सेंट्रल डिपार्टमेंट की प्रमुख माई मोहसिन, मिस्र की मरैना यूसुफ साद, ब्राजील के हारोलडो ने भी अपनी बात रखी।

तीन दिवसीय 18वें ब्रिक्स एकेडमिक फोरम

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