पहले जहां निर्माण समिति की बैठकों में ट्रस्ट की ओर से पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव की मौजूदगी नियमित मानी जाती थी, वहीं अब यह प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब है। चंपत राय और अनिल मिश्र के पद से हटने के बाद ट्रस्ट की ओर से निर्माण समिति की बैठकों में किसी पदाधिकारी की मौजूदगी न होना घटनाक्रम को और गंभीर बना रहा है।
चढ़ावा चोरी पर मुखर हुए नृपेंद्र, फिर अचानक खामोशी
छह जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने सार्वजनिक तौर पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी थी। 18 जून से दिल्ली में विभिन्न टेलीविजन चैनलों को दिए साक्षात्कारों में उन्होंने घटना को चोरी के बजाय डकैती तक बताया। हालांकि शुरुआत में उनका स्पष्ट रुख था कि उनका दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित है, लेकिन चढ़ावे और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर भी उनकी मुखर प्रतिक्रिया सामने आई।
23 जून के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से दूरी बना ली। छह जुलाई को ट्रस्ट की पहली बैठक हुई। पूर्व की बैठकों में नियमित रूप से शामिल रहने वाले नृपेंद्र मिश्र इस बैठक में नहीं पहुंचे। इसके बाद जुलाई में हुई निर्माण समिति की बैठक में ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं रहा। 19 से 21 अगस्त तक चली अगली बैठक में भी यही तस्वीर बनी रही।
कभी साथ बैठकर तय होते थे फैसले
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि करीब छह महीने पहले से ही नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से खुद को अलग करना शुरू कर दिया था। उनका फोकस केवल निर्माण कार्यों तक सीमित होता गया। सूत्रों के अनुसार, पहले निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़े छोटे-बड़े मुद्दों पर बैठकों में विस्तार से चर्चा होती थी।



