यूपी:दहेज हत्या के अनुमान पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं; तीन आरोपियों की सजा रद – Up: High Court’s Major Ruling On Dowry Death Case; States General Allegations Are Insufficient; Convictions Of


हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दहेज हत्या के मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के तहत दहेज हत्या का अनुमान तभी लागू हो सकता है, जब अभियोजन यह साबित करे कि महिला की मौत से ठीक पहले उसे दहेज की मांग को लेकर क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। केवल दहेज उत्पीड़न का सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने करीब 30 वर्ष पुराने मामले में तीन आरोपियों की सजा रद कर उन्हें बरी कर दिया।

न्यायमूर्ति मनोज बजाज ने शिव नारायण उर्फ सूर्य नारायण, जय नारायण और पटेश्वर की अपील स्वीकार करते हुए फैजाबाद(अब अयोध्या) के अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय द्वारा 30 अप्रैल 1996 को सुनाई गई दोषसिद्धि और 13 मई 1996 को सुनाई गई सजा निरस्त कर दी। 

कुएं से बरामद हुआ

ट्रायल कोर्ट ने तीनों को धारा 498-ए, 304-बी, 201 और 120-बी आइपीसी के तहत दोषी ठहराया था। मामला उर्मिला की वर्ष 1991 में हुई मौत से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार 19/20 सितंबर 1991 की रात उर्मिला लापता हुई थी। 21 सितंबर को उसका शव ससुराल के पास स्थित कुएं से बरामद हुआ। आरोप लगाया गया था कि दहेज के लिए प्रताड़ित करने के बाद उसकी हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया गया।

हाईकोर्ट ने पाया कि शव बरामद होने के समय मृतका के पिता और अन्य करीबी रिश्तेदारों ने कुएं में डूबने की आशंका जताई थी। उस समय हत्या या दहेज हत्या का आरोप नहीं लगाया गया था। घटना के 12 दिन बाद दो अक्टूबर 1991 को एफआइआर दर्ज की गई, लेकिन इस देरी का पर्याप्त स्पष्टीकरण अभियोजन नहीं दे सका।

 



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