विधानमंडल के दोनों सदनों में रखी गई संभल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए गए हैं। आयोग ने जांच में हिंसा को अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई साजिश बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 90 वर्षों के सांप्रदायिक इतिहास, एएसआई के अभिलेख, बैलेस्टिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ 199 गवाहों के बयान के आधार पर निष्कर्ष तैयार किए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 नवंबर 2024 को संभल सांसद के नाम से बने एक व्हाट्सएप ग्रुप में लोगों से शाही जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाज अदा करने की अपील की गई। इसी तरह के संदेश अन्य ग्रुपों में भी प्रसारित हुए। अगले दिन सांसद रिजाउर्रहमान बर्क के मीडिया में दिए गए बयान, यह मस्जिद है, मस्जिद थी और मस्जिद रहेगी… के वायरल होने के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अब खंगाले जा रहे हैं मंदिर के लेजर, पदाधिकारियों के साथ बैंककर्मियों से हो रही पूछताछ
ये भी पढ़ें – यूपी: चुनाव के ठीक पहले बदली यूपी की राजनीति, ब्राह्मण वोट हुआ प्रासंगिक; अखिलेश के PDA में अब आया पंडित भी
इसके बाद हिंसक भीड़ ने सर तन से जुदा जैसे नारे लगाए और पुलिस बल पर हमला कर दिया। पथराव, आगजनी और फायरिंग के दौरान पुलिसकर्मियों की पिस्टलें और मैगजीन भी लूट ली गईं। इन पिस्टलों से फायरिंग की गई, जिसमें सात पुलिसकर्मी घायल हुए। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में सांसद बर्क के साथ जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और स्थानीय विधायक प्रतिनिधि सुहेल इकबाल की भूमिका का भी उल्लेख है।
आयोग का कहना है कि अदालत के आदेश का वास्तविक स्वरूप लोगों से छिपाया गया और मस्जिद के अस्तित्व पर खतरा बताकर उकसाया गया। रिपोर्ट में संभल के इतिहास का भी उल्लेख है। आयोग ने कहा कि शहर पहले भी कई बार सांप्रदायिक हिंसा का गवाह रहा है। इसमें 1978 का दंगा सबसे विनाशकारी था। आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव दिए। कहा, कोर्ट के आदेशों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
पुलिस को क्लीन चिट: आयोग ने यह भी कहा कि हिंसक भीड़ में आपराधिक तत्व शामिल थे, जिन्होंने सुनियोजित तरीके से पुलिस को निशाना बनाया। रिपोर्ट में पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई को परिस्थितियों के अनुरूप बताते हुए कहा गया है कि संयमित एवं प्रभावी कार्रवाई के कारण भीड़ हिंदू बहुल इलाकों तक नहीं पहुंच सकी, जिससे संभावित बड़े सांप्रदायिक दंगे को टालने में सफलता मिली।