उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान एक लाख से अधिक लोग डेंगू से संक्रमित हुए हैं। अब केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की मंजूरी के बाद देश को डेंगू के खिलाफ पहली स्वीकृत वैक्सीन क्युडेंगा मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गंभीर डेंगू, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। अब लोगों की नजर इस पर है कि सरकार इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में कब तक शामिल करती है।
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) के पूर्व निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक धवन ने बताया कि भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वीकृत यह पहला टीका है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि सात वर्षों तक इस टीके के असर और निगरानी करने के बाद ये नतीजे सामने आए हैं कि यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण को रोकने में करीब 80 प्रतिशत तक कामयाब रही है।
दो खुराक बनेगी सुरक्षा की ढ़ाल
यह वैक्सीन चार से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत है। इसकी 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें तीन महीने के अंतराल पर दी जाएंगी। यह डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करती है।