Lucknow :सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के आरोप में एलयू के दो विधि छात्र निलंबित, कैंपस में प्रवेश पर भी रोक – Two Law Students From Lucknow University Suspended Over Allegations Of Creating A Ruckus At The Supreme Court.


लखनऊ विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में कथित हंगामे के आरोप में अपने दो विधि छात्रों को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रबल प्रताप सिंह और चंद्र भान को छात्रावास से भी निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही, दोनों छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को कार्यालय आदेश जारी कर यह कार्रवाई की है। यह कार्रवाई 11 जुलाई को दर्ज प्राथमिकी संख्या-108/2026 और अनुशासन समिति की 15 जुलाई की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। पूरा मामला बीते 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के एक ओपन कोर्टरूम में सुनवाई के दौरान लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक लॉ छात्र प्रबल प्रताप सिंह ने जजों के सामने कागजात उछाले और भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के लिए अपशब्द कहे थे। इस दौरान उनके साथ छात्र चंद्रभान भी मौजूद थे।

ये भी पढ़ें – यूपी: प्रदेश में खुला माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का मौका, 21252 पदों पर होंगी नियुक्तियां; जानिए डिटेल



ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आईजी रेंज लखनऊ की अध्यक्षता में बनेगी नई एसआईटी, जुलाई के अंत तक पूरी होगी जांच

छात्रों पर देश के सर्वोच्च न्यायिक संस्थान सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के प्रतिकूल आचरण करने का आरोप है। प्रबल प्रताप सिंह विधि स्नातक पांच वर्षीय पांचवें सत्र के छात्र हैं। चंद्र भान भी इसी सत्र के छात्र हैं। दोनों पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के दौरान अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। उन पर सुरक्षा कर्मी से मारपीट और न्यायिक कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तारी हुई थी। विश्वविद्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। दिल्ली पुलिस की एक टीम सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित विधि संकाय पहुंची थी। टीम ने इन छात्रों के बारे में जानकारी हासिल की और वापस लौट गई।

स्पष्टीकरण देने का निर्देश

विश्वविद्यालय ने निलंबित छात्रों को नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्त होने के तीन कार्यदिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होना होगा। इस दौरान उन्हें अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो इसे बचाव में कुछ न कहना माना जाएगा। इसके बाद उनके विरुद्ध अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *