उत्तर प्रदेश में कौशल विकास का दायरा बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन अब निजी आईटीआई को ट्रेनिंग पार्टनर बनाया जाएगा। इसके तहत निजी आईटीआई अपने यहां निर्धारित समय की पढ़ाई के बाद अन्य युवाओं को भी ट्रेनिंग दे सकेंगी। मिशन इसके लिए बजट भी देगा।
प्रदेश में 2,932 निजी आईटीआई हैं। इनमें 3.40 लाख से अधिक सीटें हैं। हाल के दिनों में इन आईटीआई में छात्रों का प्रवेश कुछ कम हुआ है जबकि इनके पास काफी संसाधन हैं। ऐसे में इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
इसमें अधिकतर आईटीआई ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। वहीं, कौशल विकास मिशन का भी पूरा फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर है। इसके मद्देनजर कौशल विकास मिशन ने निजी आईटीआई को भी ट्रेनिंग पार्टनर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
अतिरिक्त युवाओं को ट्रेनिंग कराएंगे
मिशन के प्रस्ताव के अनुसार, पांच ग्रेडिंग वाले आईटीआई, जिनके पास ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त संसाधन होंगे, उनको ही ट्रेनिंग पार्टनर बनाया जाएगा। पर, ये अतिरिक्त युवाओं को ट्रेनिंग अपने यहां प्रवेशित छात्रों की पढ़ाई व प्रशिक्षण के बाद ही कराएंगे। उनके लिए अलग से टाइम टेबल भी बनाना होगा।
इससे जहां इन आईटीआई के संसाधनों का सदुपयोग होगा और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। मिशन की ओर से हाल ही में फिटर में 20 और इलेक्ट्रिशियन में 16 शर्ट टर्म कोर्स शामिल किए गए हैं। मिशन इन पाठ्यक्रमों में ट्रेनिंग देने को ऑफर करेगा। इससे युवा अत्याधुनिक क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे और रोजगार के लिए भी तैयार होंगे।
मिशन ने शासन को भेजा प्रस्ताव
कौशल विकास मिशन ने निजी आईटीआई को ट्रेनिंग पार्टनर बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा है। वहां से हरी झंडी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। इससे प्रदेश में अधिकाधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। वहीं, निजी आईटीआई की समस्या भी कम होगी और उन्हें बजट भी मिलेगा।