शोध:फफूंदजनित बीमारी रोकने के लिए एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने खोजा जैविक तरीका, किसानों को होगा फायदा – Beneficial Bacteria Will Eliminate Crop-destroying Fungus.


राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के वैज्ञानिकों ने फसलों को फफूंद से बचाने का नया तरीका खोजा है। यह एक सुरक्षित और जैविक विधि है। इसमें एक अच्छे जीवाणु और दो जैव रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया गया है।

यह खोज ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण है जब फफूंदरोधी (एंटीफंगल) दवाएं बेअसर हो रही हैं। ‘राइजोक्टोनिया सोलानी’ नामक फंगस धान, गेहूं, मक्का, आलू, टमाटर, सोयाबीन और मूंगफली जैसी कई फसलों को नुकसान पहुंचाता है। इससे फसलों का उत्पादन घट जाता है और किसानों को भारी नुकसान होता है।

ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय लापरवाही के दोषी, अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल, कसेगा कानूनी शिकंजा



ये भी पढ़ें – अनिल मिश्रा के करीबी दो कर्मचारी राम मंदिर ट्रस्ट से हटे, परिसर में प्रवेश करने पर रोक

वैज्ञानिकों ने बैसिलस एमाइलोलिक्वीफेसी (एनबीआरआई-एसएन 13) नामक अच्छे जीवाणु का परीक्षण किया। इसके साथ 5-एजासिटिडाइन (एजेडए) और सोडियम ब्यूटीरेट (एसबी) को भी आजमाया गया। सबसे बेहतर परिणाम एसएन 13 और एजेडए को एक साथ देने पर मिले। इन उपचारों से फंगस के जीन में बदलाव आया, जिससे उसका असर अंदरूनी हिस्से तक पहुंचा। इस प्रयोग से फंगस का बढ़ना ही नहीं रुका, बल्कि उसके अंकुरित होने की क्षमता भी प्रभावित हुई। नए तरीके से फंगस की कोशिकाओं को भी क्षति पहुंची।

धान पर असर: धान के पौधों पर किए गए परीक्षणों में एसएन 13 के उपचार से फंगस का संक्रमण बहुत कम पाया गया। एजेडए के उपयोग से पौधों की फंगस से लड़ने की क्षमता में वृद्धि हुई। दोनों को साथ देने पर इसका असर और भी बेहतर तथा कारगर साबित हुआ। धान पर दो साल तक किए गए ग्रीन हाउस परीक्षणों में फफूंद की बीमारी पर नियंत्रण स्पष्ट रूप से देखा गया।

शोध में शामिल वैज्ञानिक टीम: इस शोध टीम में शुचि श्रीवास्तव के साथ अनन्या द्विवेदी, अक्षिता माहेश्वरी, मेहर एच. आसिफ, गरिमा सक्सेना, अनामिका अस्थाना और पल्लवी शामिल थीं। यह शोध प्रासेस सेफ्टी एंड एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

एनबीआरआई के निदेशक डॉ. जबीर अहमद का कहना है कि बेअसर हो रहे एंटीफंगल रसायनों के बीच एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने देश के किसानों को एक सुरक्षित और जैविक विकल्प दिया है। इससे किसानों को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *