टोल शुल्क के लिहाज से देश के सबसे महंगे एक्सप्रेसवे में शामिल कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। उद्घाटन का एक महीना पूरा होने पर अमर उजाला ने एक्सप्रेसवे की लाइव पड़ताल की तो सड़क की गुणवत्ता और निर्माण की तैयारियों पर कई सवाल खड़े होते दिखाई दिए। 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के करीब 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में छोटे बड़े 64 गड्ढे मिले। इनमें से अधिकांश को भरा जा चुका है लेकिन लंबी उखड़ी सड़कों की मरम्मत का काम चालू है। डायवर्जन तो नहीं है लेकिन जगह-जगह मरम्मत कार्य, उखड़ी सड़क, पैचवर्क और असमतल सतह के कारण 45 मिनट में कानपुर पहुंचने का दावा फेल हो गया है। इन वजहों से ये सफर करीब 70 मिनट का हो गया है।
सर्विस लेन में उगी ढाई फिट की लंबी घास गवाही दे रही है कि एक्सप्रेसवे में हड़बड़ी की गई है। दोनों तरफ कम से कम 42 स्थानों पर मिट्टी के ढेर मिले। कई जगह सड़क की मरम्मत किए जाने के बावजूद पैचवर्क दोबारा उखड़ा हुआ मिला। सबसे ज्यादा समस्या कानपुर से लखनऊ की दिशा वाले मार्ग पर दिखाई दी। इस तरफ लंबे पैचवर्क किए जा रहे हैं और कुछ जगह पूरी सड़क को काटकर दोबारा बनाया जा रहा है।
लखनऊ से कानपुर की तरफ चलते हुए करीब 28वें किलोमीटर से 35 किलोमीटर तक लगभग साढ़े छह से सात किलोमीटर के हिस्से में साइड लेन और किनारे मरम्मत होती दिखाई दी। सड़क किनारे गिट्टी, डामर आदि के भारी भंडार और मशीने खुद निर्माण में लापरवाही के संकेत दे रही थीं।
करीब 37.6 किलोमीटर तक पहुंचने पर पांच स्थानों पर नालियों का काम चलता मिला। नालियां बनी हैं लेकिन पानी की निकासी के लिए बाद में तोड़ा गया। क्रैश बैरियर ने कई जगह नालियों को बंद कर दिया था, इस वजह से पानी बाहर न निकल कर सड़क के अंदर गया। इसे दुरुस्त किया जा रहा था।
39.5 किलोमीटर के पास बने पुल पर दरार भरने का काम तेजी से होता मिला। इसके ठीक आगे 39.8 किलोमीटर के पास कानपुर से लखनऊ की दिशा वाले मार्ग पर सड़क की बड़े पैमाने पर कटाई कर मरम्मत का काम चलता मिला। इस दौरान मार्ग की चार लेन में से केवल एक लेन पर यातायात चलता दिखाई दिया।