महापौर और उनकी ही पार्टी के पार्षदों के बीच दो साल से चल रही तकरार अब आर-पार की लड़ाई तक पहुंच गई है। भाजपा के 80 पार्षद दो गुटों में हैं। इनमें से एक महापौर सुषमा खर्कवाल और दूसरा उनके विरोधियों का है। अब उन पार्षदों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संगठन को बंद लिफाफे में पत्र भेजा गया है, जो महापौर पर अवस्थापना निधि के कामों में पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं। यह पत्र पार्षदों की ओर से भेजा गया है।
महापौर का विरोधी गुट आरोप लगा रहा है कि उन्होंने अवस्थापना निधि से होने वाले कार्यों के आवंटन में पक्षपात किया है। सिर्फ उन्हीं पार्षदों के वाडों में काम दिए गए, जो उनके करीब हैं। यह आरोप भी लगाया है कि सांसद राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के 88 वाडों में विकास कार्य के लिए केवल 18 करोड़ रुपये मिले हैं। उधर, सपा सांसद आरके चौधरी के मोहनलालगंज क्षेत्र के मात्र 22 वाडों में 32 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं। महानगर भाजपा अध्यक्ष से मिलकर इसकी शिकायत भी की गई थी।