हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता से संबंधित मामले में अधिकारियों की सुस्ती पर राज्य सरकार पर 50000 रुपये का हर्जाना लगाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश उदय प्रताप सिंह की ओर से वर्ष 2019 में दायर जनहित याचिका पर दिया।
याचिका में प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता का मुद्दा उठाया गया था। 16 दिसंबर 2025 को अदालत ने इस मामले में अधिकारियों से जवाब मांगा था। अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि विशेष सचिव की अध्यक्षता वाली जिस समिति को शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता देने या वापस लेने पर विचार करना था, वह बैठक अब तक नहीं हो पाई। संबंधित अधिकारी आठ माह में एक भी दिन बैठक करने के लिए नहीं निकाल पाए। राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट से कार्यवाही का ब्योरा पेश करने को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा।
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इस पर न्यायालय ने मांगा समय 50 हजार रुपये हर्जाने के साथ समय दे दिया। कहा कि हर्जाने के साथ समय अफसरों की उस सुस्ती और असंवेदनशीलता के लिए दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ये कार्यवाही लंबित है। न्यायालय ने कहा, हमें नहीं पता कि ये कार्यवाही कब तक लंबित रहेगी। न्यायालय ने निर्देश दिया कि यह मामला 7 सितंबर को इस न्यायालय के समक्ष आएगा, जब संबंधित विशेष सचिव निर्णय के साथ इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे।