लखनऊ। अब कला सिर्फ कैनवास और मूर्तियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए दरवाजे भी खोलेगी। बृहस्पतिवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के बीच पहली बार हुए समझौता पत्र (एमओयू) से विश्वविद्यालय के कला और डिजाइन से जुड़े 94 विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलने का रास्ता तैयार हुआ है।
मोहान रोड स्थित विश्वविद्यालय में कला संकाय और डिजाइन से जुड़े चार वर्षीय बैचलर ऑफ विजुअल आर्ट कोर्स में 50 विद्यार्थी और दो वर्षीय मास्टर ऑफ विजुअल आर्ट कोर्स में 44 विद्यार्थी हैं। इन पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक कला, मूर्ति कला और डिजाइन शामिल हैं। एमओयू के तहत कलाकारों को डिजिटल मार्केटिंग, कॉपीराइट और ई-कॉमर्स के माध्यम से अपनी कला को बाजार तक पहुंचाने और अपना ब्रांड बनाने का प्रशिक्षण देने की दिशा में अवसर तैयार किए जाएंगे।
राज्य ललित कला अकादमी की निदेशक डॉ. श्रद्धा शुक्ला ने बताया कि एमओयू के तहत दोनों संस्थानों के बीच फैकल्टी व स्टाफ एक्सचेंज कार्यक्रम सबसे पहले लागू होगा, जिससे शिक्षक और शोधकर्ता एक-दूसरे के यहां जाकर अध्यापन और अनुसंधान कार्य कर सकेंगे। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों को रोजगारपरक अवसर देने को प्रतिबद्ध है।