गुजरात के स्कूलों में बाहरियों की एंट्री बैन, लेनी होगी लिखित परमिशन


गुजरात सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहर से आने वाले लोगों को लेकर एक नया सर्कुलर जारी किया है. गुजरात में अब सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों को बिना परमिशन के एंट्री नहीं मिलेगी. गुजरात के स्कूलों में प्रवेश को लेकर सरकार ने पूरी गाइडलाइन भी जारी की है. प्रवेश के साथ ही बाहरी लोगों के फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी कड़ी पाबंदी लगा दी गई है.

नई गाइडलाइन के अनुसार, अब स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए बाहरी व्यक्ति को स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान प्रमुख से लिखित परमिशन लेनी होगी और विजिटर को अपनी पूरी डिटेल भी दर्ज करानी होगी. वहीं सरकार के इस फैसले के बाद अब इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. 

प्राइवेसी सुनिश्चित करने के लिए लिया निर्णय 

गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल के अनुसार राज्य में पिछले कुछ समय से रील बाजी और टोलेबाजी दिखाई दे रही थी. इसके बाद स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा और परेशानी को रोकने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया है. राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार प्राइमरी, सेकेंडरी और हाई सेकेंडरी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा, प्राइवेसी और भलाई तय करने के लिए ही यह निर्देश जारी किया गया है. इन नियमों में अधिकृत सरकारी अधिकारियों को पूर्व लिखित परमिशन से छूट दी गई है. 

In Loco Parentis के तहत लिया निर्णय 

गुजरात सरकार की ओर से जारी सर्कुलर में इन लोको पैरेंटिस की बात पर जोर दिया गया है. जिसका मतलब है कि माता-पिता की भूमिका निभाने के सिद्धांत के तहत राज्य सरकार की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के प्रति एक विशेष जिम्मेदारी होती है.  इस फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 और सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें प्राइवेसी के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था.

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा

गुजरात सरकार के इस फैसले को लेकर गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने भी साफ किया है कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए स्कूलों में प्रवेश के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है. बस उन्हें स्कूल में एंट्री के लिए प्रिंसिपल या स्कूल के प्रमुख की परमिशन लेनी होगी. शिक्षा मंत्री के अनुसार, यह एडवाइजरी बच्चों की प्राइवेसी, उनके वीडियो रिकॉर्ड होने और मीडिया में प्रसारित होने की घटनाओं को रोकने के लिए जारी किया गया है. 

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विपक्ष ने किया विरोध 

गुजरात सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति दर्ज कराई हैं. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार स्कूलों की खराब बुनियादी स्थिति के वायरल हो रहे वीडियो और अपनी कमियों को छुपाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है. इसके अलावा विपक्ष ने गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. बीजेपी ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर लोगों पर कार्रवाई की जाएगी.

कांग्रेस का दावा स्कूलों की स्थिति छिपाने के लिए लिया निर्णय

गुजरात सरकार के कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने राज्य सरकार के फैसले को लेकर कहा कि सरकार को बच्चों की सुरक्षा के नाम पर एडमिनिस्ट्रेटिव नाकामियों को छुपाने का कोई अधिकार नहीं है.  उन्होंने कहा कि कमरों पर रोक लगाने से टीचरों की कमी क्लास, रूम की हालत या स्कूलों की सुविधाओं की कमी दूर नहीं होगी. दोशी ने कहा कि राज्य में करीब 40,000 टीचर की पोस्ट खाली है और करीब 42,000 क्लासरूम खराब हालत में है. उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 3,000 स्कूल एक ही टीचर के भरोसे चल रहे हैं, जिनमें 80,000 से ज्यादा स्टूडेंट पढ़ते हैं, जबकि करीब 14,500 स्कूलों में कई क्लास के स्टूडेंट एक साथ पढ़ाई करते हैं.

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