विधानसभा चुनाव में करीब छह माह का समय शेष बचा है। आमतौर पर हर बार जाति और धर्म को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तलवारें खिंचनी शुरू हो जाती हैं लेकिन इस बार दिल्ली में जंतर-मंतर पर जेन जी के प्रदर्शन के बाद ये सभी पुराने सियासी दांवपेंच बेअसर हो चुके हैं। राजनीतिक दल जात-पात की राजनीति के बजाय जेन जी पर फोकस करने में जुटे हैं। इसमें बहुजन समाज पार्टी भी पीछे नहीं है और युवाओं को लुभाने के लिए उसने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बदले माहौल को भांपते हुए जेन जी पर फोकस करना शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने भी हाथरस के सादाबाद में आयोजित जनसभा में जेन जी को लेकर आक्रामक भाषण दिया है। बसपा सुप्रीमो ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में कहा कि ‘विकसित भारत’ व ‘मेरा भारत महान’ आदि का सुनहरा सपना साकार करने की क्षमता रखने वाली युवा पीढ़ी अब सभी सरकारों से जवाबदेही मांग रही है।
वे यही चाहते हैं कि संविधान में संवैधानिक संस्थाओं के लिए जो ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था है, वह लचर और ढुलमुल न होकर प्रभावी साबित हो, ताकि कोई भी निरंकुश न होने पाए। देश की आबादी का लगभग 52 प्रतिशत 30 वर्ष से कम आयु वाले युवा है। सभी सरकारों को यह याद रखना जरूरी है कि युवा वर्ग अपना भविष्य संवारने के लिए जद्दोजहद कर रहा है लेकिन उसका सही फल नहीं मिलने से व्यवस्था में बैठे लोगों की जवाबदेही के लिए अति-मुखर भी हो गया है। वे बेहतर स्कूल, अस्पताल व सड़क आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए शासन-प्रशासन से जवाबदेही चाहते हैं। लिहाजा सभी सरकारों को सतर्क हो जाना ही समय की सबसे अहम मांग है।