यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘कलह के पीछे का सबब’ की कहानी। इसके अलावा ‘फंड रोकने से बढ़ेगा ब्याज’ और ‘अफसर की माया निराली’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
कलह के पीछे का सबब
यूं तो हाथियों के बीच खासी एकता होती है और वह एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ते हैं लेकिन सियासत में मामला उलट होता है। सत्ता पर पकड़ करीबियों से दूरी की वजह भी बन जाती है। अब भला उन्हें कौन समझाए कि ऊंची चारदीवारी के पीछे से जनता की नब्ज पहचानना आसान नहीं है। गली-कूचों में जाकर गरीबों के सिर पर हाथ रखने के सिवाय जीत का कोई विकल्प नहीं है। जब प्रदेश का करीब आधा वोटर युवा हो तो अपने दल के युवा चेहरे पर भरोसा नहीं करना भारी पड़ सकता है।
फंड रोकने से बढ़ेगा ब्याज
प्रदेश में युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षण देकर तैयार करने वाले विभाग में सब सही नहीं है। विभाग के बड़े साहब कहते हैं कि काम करने वालों का पैसा समय से जारी करो लेकिन उनके ही एक मातहत के नियम अलग हैं। वह कहते हैं कि फंड देर से जारी करो तो ब्याज मिलेगा। अब विभाग में काम करने वाली संस्थाएं इन दो पाटों में पिस रही हैं और अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।
अफसर की माया निराली
मरीजों के इलाज से जुड़े अस्पतालों के बिल ऑडिट करने वाले विभाग की गजब माया है। विभाग हर पखवाड़े 10 से 15 अस्पतालों पर कैंची चला रहा है। अस्पतालों पर कैंची चलाने का बाकायदा दावा भी किया जाता है लेकिन नाम पूछते ही विभाग के अफसर बगलें झांकने लगते हैं। उन्हें अस्पताल का नाम नहीं पता है लेकिन अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके द्वारा गलत बिलिंग करने का दावा लगातार किया जा रहा है। अब विभाग के कर्मचारी भी कहने लगे है कि उनके अफसर की माया निराली है। इसलिए बात को पर्दे में रहने दें।