यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘छींका टूटने का इंतजार’ की कहानी। इसके अलावा ‘हर पल आदेश का इंतजार’ और ‘जेन-जी का तेवर देख बैकफुट पर मुखिया’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
छींका टूटने का इंतजार
दशहरे तक नौकरशाही में बड़े फेरबदल होने हैं लेकिन सबसे ज्यादा नजरें एक कद्दावर नौकरशाह के रिटायरमेंट पर हैं। चूंकि उनके पास बेहद महत्वपूर्ण महकमे हैं। ऐसे में उन पर काबिज होने के लिए जोड़-तोड़ चालू हो गई है। कल कारखाने से जुडे़ विभाग का मुखिया बनने की दौड़ में कई अधिकारी हैं। लाजमी है कि अंदरखाने घनघोर राजनीति भी चल रही है। ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में चर्चा है कि दौड़ दिल्ली तक है।
हर पल आदेश का इंतजार
पुलिस महकमे में एक वरिष्ठ अधिकारी पुलिस महानिदेशक के पद पर प्रमोट हो चुके हैं लेकिन अब तक वह जोन की ही कमान संभाले हैं। हर पल वह अपने तबादले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रैंक के अनुरूप विभाग व पद मिल सके। इसी तरह की बेचैनी एक और वरिष्ठ अफसर को भी है। उनकी परेशानी इससे मिलती जुलती है। उनका प्रमोशन डीजी के पद पर होना है। जगह भी खाली है लेकिन दो सप्ताह से आदेश जारी नहीं हो सका। अब देखना होगा कि आखिर कब दोनों अफसरों की बेचैनी शांत होती है।
जेन-जी का तेवर देख बैकफुट पर मुखिया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का व्यापक असर दिखने लगा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में गुरुजी और मुखिया लोग दबाव में हैं। छात्रों से मेलजोल बढ़ा दिया है। हालत यह है कि प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में एक महीने से चल रहे छात्र आंदोलन को अचानक समाप्त कराने की मुखिया ने खुद कवायद शुरू कर दी है जबकि अभी तक वह इन छात्रों से बात करने के लिए भी तैयार नहीं थे। जानकारी मिली है कि ऊपर से मुखिया को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं कि जल्दी से जल्दी मामला सुलटाएं ताकि कोई विपरीत हालत न बने।