धर्मांतरण गिरोह की गहरी पैठ:केरल से लखनऊ आती टीम; लालच में आकर रामलाल करने लगे यीशु की प्रार्थना, नए खुलासे – Penetration Of Conversion Racket In Lucknow Team Used To Arrive From Kerala New Revelations In Investigation


राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज में पकड़े गए धर्मांतरण गिरोह की जड़ें बहुत गहरी हैं। गुप्त तरीके से हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए केरल से टीम बुलाई जाती थी, जो राजधानी में मौजूद साथियों को धर्मांतरण का परीक्षण देती थी। टीम ने लोगों का ऐसा ब्रेनवाश किया कि वे अपने धर्म को त्याग कर ईसाई बन गए।

लालच में आकर मोहनलालगंज के रामलाल अचानक यीशु की प्रार्थना करने लगे। ये ही नहीं, महिपाल, श्रीकांत व उनकी पत्नी, मलखान व अन्य लोग भी रविवार को प्रार्थना सभा में उपस्थित रहने लगे। देखते ही देखते गौरा गांव में भी चर्च स्थापित हो गया। गिरोह ने नगराम, निगोहां, कृष्णानगर, आलमबाग व आसपास के इलाके में भी पैठ जमा ली। आशियाना के किला गांव में भी गिरोह सक्रिय रहा। दलित समाज के लोगों को सबसे पहले निशाना बनाया गया।

प्रार्थना सभा में भीड़ कम दिखी

पुलिस की सख्ती के कारण रविवार को मोहनलालगंज के इलाके में होने वाली प्रार्थना सभा में भीड़ कम दिखी। कृष्णानगर में आश्रम रोड पर एक मकान में भी हर रविवार को संदिग्ध गतिविधियां हो रही थीं। इसकी शिकायत भी लोगों ने की। हालांकि, रविवार को वहां सन्नाटा देखने को मिला। चार से पांच लोग ही प्रार्थना सभा में पहुंचे।

विरोध किया तो निकाल दिए गए थे 200 कुष्ठ रोगी

सामाजिक कार्यकर्ता दयालु प्रसाद जायसवाल ने दावा किया कि वर्ष 1985 में मोहनलालगंज स्थित मिशनरी ऑफ चैरिटी में रह रहे करीब 200 कुष्ठ रोगियों को धर्मांतरण का दबाव झेलना पड़ा। वह भी प्रताड़ना के शिकार हुए। आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन से इन्कार करने पर सभी रोगियों को आश्रम से निकाल दिया गया। जन्माष्टमी का पर्व मनाने पर संस्थान के प्रबंधन ने आपत्ति जताई। इसके बाद कुष्ठ रोगियों पर धर्मांतरण का दबाव बनाया गया।

विरोध किया तो खानी पड़ी लाठी

आश्रम से निकाले जाने से नाराज कुष्ठ रोगी सड़क पर आ गए। अपने अधिकारों और पुनर्वास के लिए प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। उस समय के तत्कालीन एसडीएम हरिश्चंद्र प्रकाश ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।



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