Suna Hai Kya:बकाया धनराशि से सकते में पदाधिकारी, क्रेडिट न मिलने से भड़के अफसर, पढ़ें आज के ये किस्से – Suna Hai Kya: Officials Stunned By Outstanding Dues; Officers Furious Over Lack Of Credit


अमर उजाला के “सुना है क्या” कॉलम में बात होती है सत्ता के उन ताकतवर गलियारों की जहां पर अफसरों और नेताओं के बीच खुद को ज्यादा ताकतवर दिखाने की कश्मकश चलती रहती है और ये कभी खत्म नहीं होती है। आज बात खेल एसोसिएशन के पुराने बकाये, क्रेडिट न मिलने से आईपीएस अफसर की नाराजगी और एक नेताजी के कारनामों की।

कम नहीं हो रहा बकाया

प्रदेश में एक खेल एसोसिएशन चर्चा में है। बीते दिनों एसोसिएशन ने धूम-धड़ाके से प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता की घोषणा की। कुछ दिन बीते होंगे कि एसोसिएशन कार्यालय में खेल विभाग की ओर से तीन साल पुरानी बकाया धनराशि जमा करने का नोटिस आ गया। इससे पदाधिकारी सकते में आ गए और कम कराने की जुगत में लग गए। उच्चाधिकारियों से मिलकर मनुहार के बाद भी चवन्नी कम नहीं हुई। उम्मीदों पर पानी फिरने से सूबे की सबसे बड़ी चौखट पर माथा टेकने की मजबूरी हो गई। हालांकि, वहां भी रियायत की उम्मीद कम है।

अब इन पर दो ध्यान

एक कमिश्नरेट में बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा हुआ। सौ से अधिक आरोपी जेल भेजे गए। मामला बड़ा था तो कमिश्नरेट के मुखिया ने पत्रकार वार्ता की। ये बात गुडवर्क करने वाली टीम में शामिल आईपीएस को खटक गई क्योंकि उनको क्रेडिट नहीं मिल सका। फिर क्या था? एक परिजन को सक्रिय किया। उन्होंने इधर-उधर खबरनवीसों को फोन लगाना शुरू किया और सीधे कहा कि सीपी का गुणगान बहुत हो गया। गुडवर्क में जिनकी मेहनत थी, उनका नाम चलाओ और छापो।

हम नहीं सुधरेंगे

हाईकमान के जिले के पास तैनाती पाने वाले एक तलवारधारी स्थानीय नेताओं के कोप का शिकार बन गए। सबने मिलकर उन्हें किनारे लगाने में कसर बाकी नहीं रखी लेकिन कुछ अफसरों की खुशामद से उन्हें जिला तो नहीं कमिश्नरेट का हिस्सा बनने का मौका मिल गया। यहां भी उनकी कारगुजारियां कम नहीं हुईं और खास जाति के लोगों को निशाना बनाने लगे। अंदरखाने चर्चा है कि जिले में जिन नेताओं ने उनका नुकसान किया, वह भी उनकी जाति के थे। इसी वजह से साहब अब बदला तो नहीं ले रहे हैं।

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