राम मंदिर:चढ़ावे में गिनती से पहले पार हो जाती थी रकम, Fir की जगह इसलिए चुना गया Sit का रास्ता; जानिए मामला – Ram Temple: Offerings Were Often Extorted Before They Could Be Counted, Leading To The Sit’s Decision Instead


श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की राशि में हुए गबन का अंदाजा लगाना आसान नहीं होगा। उसकी कई वजहें हैं। दरअसल, मंदिर में आई चढ़ावे की राशि का हिसाब लगाने के लिए ही गिनती की जाती थी। मतलब उसके पहले ये राशि बेहिसाब होती थी। उसी दौरान उसमें से रकम पार की जाती थी। आखिर में जोड़-घटा कर विवरण दर्ज कर दिया जाता था। साफ है कि जो विवरण दर्ज हो गया, वही हिसाब हो गया। इसलिए गबन कितने करोड़ का हुआ, यह स्पष्ट अंदाजा लगाना काफी कठिन है। वहीं अब बड़े जिम्मेदार इधर-उधर भाग रहे हैं।


मंदिर के चढ़ावे का हिसाब-किताब रोजाना होता था। रोजाना लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। अधिकतर कुछ न कुछ चढ़ावा जरूर देते हैं। इसमें छोटी से लेकर बड़ी रकम व सोना-चांदी भी होता है। आम दिनों की अपेक्षा त्योहार, वीकेंड आदि के अवसर पर राशि में कई गुना बढ़ोतरी भी होती है। सूत्रों के मुताबिक, गिनती करने से पहले सभी दानपात्र खोले जाते थे। पूरी रकम एक जगह इकट्ठा की जाती थी। तब तक यह पता नहीं रहता था कि किस दानपात्र में कितनी और रकम है। इसी के लिए गिनती होती थी, लेकिन उसी दौरान रकम पार की जाती रही। अब देखना होगा कि एसआईटी इसका आकलन कैसे करेगी।



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